Birth Asphyxia से बचाव के लिए डॉक्टरों व पैरामेडिक्स को दी गई bNRP ट्रेनिंग, “Golden Minute” की अहमियत पर जोर!
रिपोर्ट:News10plus एडिटर मोहम्मद राशिद -सैय्यद| टांडा अम्बेडकरनगर। महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशुओं की सुरक्षा एवं Birth Asphyxia जैसी
गंभीर समस्या से बचाव के उद्देश्य से रविवार 10 मई 2026 को Basic Neonatal Resuscitation Program (bNRP) पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार Birth Asphyxia भारत में नवजात शिशुओं की मृत्यु एवं दीर्घकालिक मस्तिष्क क्षति का एक प्रमुख कारण है। जन्म के तुरंत बाद का पहला एक मिनट, जिसे “Golden Minute” कहा जाता है,
नवजात के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान यदि प्रशिक्षित डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा सही तरीके से Neonatal Resuscitation किया जाए, तो शिशु की मृत्यु एवं मस्तिष्क क्षति के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए National Neonatology Forum के निर्देशन में प्रदेशभर की प्रसव इकाइयों पर कार्यरत डॉक्टरों एवं पैरामेडिक्स के लिए Basic Neonatal Resuscitation Program के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
अम्बेडकरनगर जनपद में यह कार्यशाला मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के निर्देशन एवं बाल रोग विभागाध्यक्ष की देखरेख में केंद्रीय पुस्तकालय स्थित स्किल लैब में दो पालियों में संपन्न हुई। प्रथम पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की गई।
कार्यशाला में मेडिकल कॉलेज के 40 डॉक्टर एवं पैरामेडिक्स सहित जिले के विभिन्न प्रसव केंद्रों से आए लगभग 50 डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल कर्मियों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण सत्र में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विजय यादव,
डॉ अतुल कुमार मिश्रा, डॉ अमित गुप्ता तथा स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ प्रिया सिंह ने प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल एवं Resuscitation Techniques का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले में नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने एवं सुरक्षित मातृत्व अभियान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।




