रिपोर्ट:News10plusएडिटर मोहम्मद राशिद-सैय्यद| अम्बेडकरनगर। मोहर्रम के अवसर पर लोग विभिन्न तरीकों से ग़म-ए-हुसैन का इज़हार करते हुए कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश कर रहे हैं।
भीषण गर्मी के बीच जहां प्यास की शिद्दत बढ़ जाती है, वहीं कर्बला की उस ऐतिहासिक कुर्बानी की याद भी ताज़ा हो जाती है, जब हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम)
और उनके 71 साथियों ने अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध डटकर मुकाबला किया तथा शहादत का जाम पिया। इसी क्रम में समाजसेवी काशिफ अहमद अंसारी ने आठवीं मोहर्रम के जुलूस में शामिल होकर

नैपुरा स्थित मिन्हाज हैदर के निवास स्थान से उठकर सकरावल पूरब स्थित इमामबाड़े तक पहुंचने वाले आठवीं मोहर्रम के जुलूस में काशिफ अहमद अंसारी ने अपनी ओर से
पानी की बोतलें वितरित कीं। इसके साथ ही बच्चों के लिए चॉकलेट एवं जीरा पेय की भी व्यवस्था की गई, जिसे लोगों ने सराहा। जुलूस में शामिल लोगों ने इस मानवीय और सेवा भाव से प्रेरित पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि
मोहर्रम केवल ग़म का पर्व ही नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सेवा और भाईचारे का संदेश भी देता है। कर्बला के शहीदों की याद में प्यासों को पानी पिलाना सबसे बड़ी इबादत और सवाब का कार्य माना जाता है।
समाजसेवी काशिफ अहमद अंसारी ने कहा कि कर्बला की कुर्बानी पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा है। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, जिसकी मिसाल दुनिया के इतिहास में आज भी कायम है।




