रिपोर्ट:News10plusएडिटर मोहम्मद राशिद(सैय्यद) बसखारी अम्बेडकरनगर (किछौछा)। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत सैय्यद मख़दूम अशरफ जहांगीर सिमनानी के 640वें उर्स-ए-मुकद्दस के तहत —
सोमवार 13 जुलाई (27 मोहर्रम) को दरगाह शरीफ में आस्था, श्रद्धा और अकीदत का भव्य संगम देखने को मिला। लाखों जायरीन खिरका मुबारक की जियारत और गागर की रस्म में शामिल होने के लिए दरगाह शरीफ पहुंचे।
दरगाह मुतवल्ली एवं सज्जादानशीन सैय्यद मोहियुद्दीन अशरफ ने खिरका मुबारक धारण कर पूरे शानो-शौकत के साथ लहदखाने से सहन-ए-आस्ताना तक रिवायती जुलूस की अगुवाई में पहुंचे।
इस दौरान मंगल आलम शाह के नेतृत्व में फुकराओं की टीम सबसे आगे चलकर रस्मी परंपराओं का निर्वहन करती रही। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए
बसखारी थाना प्रभारी भूपेंद्र सिंह, और पुलिस अधिकारी सज्जाद खान, एवं बसखारी थाने की पुलिस हमराही अजीत कुमार सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहा।
भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि थाना अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह और उनके साथ लगे रहें पुलिसकर्मी लगातार पसीने से तरबतर होकर व्यवस्था संभालते रहे, लेकिन पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।
सहन-ए-आस्ताना पहुंचने के बाद सज्जादानशीन सैय्यद मोहियुद्दीन अशरफ ने पारंपरिक गागर की रस्म अदा की तथा मुल्क में अमन, शांति, भाईचारे, खुशहाली और सभी जायरीनों की दिली मुरादें पूरी होने की दुआ मांगी।
इसके बाद खिरका मुबारक की जियारत के लिए अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर पर दरगाह कमेटी के अध्यक्ष सैय्यद अजीज़ अशरफ, सैय्यद फैजान अशरफ (चाँद मियां), सैय्यद मेराजुद्दीन अशरफ,
सैय्यद खलिक अशरफ, सैय्यद सेराज अहमद (गुड्डू) सहित दरगाह कमेटी के समस्त जिम्मेदारान, वालंटियर, खानवादा-ए-अशरफिया तथा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उर्स मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। जिलाधिकारी ईशा प्रिया एवं पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने स्वयं मेला क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन का जायजा लिया
तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।वहीं नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा द्वारा मेले में साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य नागरिक सुविधाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता भी समय-समय पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते रहे, जिससे दूर-दराज़ से आए जायरीनों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जहां आज सोमवार को एक लाख से अधिक जायरीनों के पहुंचने का अनुमान लगाया गया।
640वें उर्स-ए-मुकद्दस का यह आध्यात्मिक आयोजन गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सूफी परंपरा की जीवंत मिसाल बनकर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।




