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640वें उर्से मुकद्दस में अकीदत का सैलाब: सज्जादानशीन सैय्यद मोईन अशरफ ने अदा की गागर की रस्म, खिरका मुबारक की जियारत को उमड़ी हज़ारों जायरीनों की भीड़!

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रिपोर्ट:News10plusएडिटर मोहम्मद राशिद(सैय्यद) अम्बेडकरनगर|किछौछा विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत सैय्यद मख़दूम अशरफ जहांगीर सिमनानी के 640वें उर्से मुकद्दस के अवसर पर 25 मोहर्रम को आस्था, श्रद्धा और अकीदत का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला।इस अवसर पर सज्जादानशीन सैय्यद मोईन अशरफ ने परंपरानुसार खिरका मुबारक धारण किया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच खानकाह-ए-हुसैनिया अशरफिया से जुलूस की शक्ल में सहन-ए-आस्तान-ए- आलिया पर पहुंचकर गागर की रस्म अदा की।

रस्म की अदायगी के बाद विशेष दुआ की गई, जिसमें देश-दुनिया में अमन, शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी गई। इस दौरान दरगाह परिसर में मौजूद हजारों अकीदतमंदों ने खिरका मुबारक की जियारत कर अपनी-अपनी मन्नतें मांगीं।हर वर्ष की तरह इस बार भी उर्से मुकद्दस में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह पहुंचे हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से की गई दुआ कबूल होती है, यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं और रूहानी सुकून की तलाश में दरगाह शरीफ पहुंचते हैं।

खानकाह-ए-हुसैनिया अशरफिया से निकलने वाले जुलूस में मंगल आलम शाह अपनी मलंगों की टोली के साथ सबसे आगे रहे। मलंगों ने पारंपरिक अंदाज़ में विभिन्न करतब प्रस्तुत किए, जिन्हें देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।उर्स के मद्देनज़र पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। थाना बसखारी के प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे, जिससे धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम समाप्त होने के उपरांत सज्जादानशीन सैय्यद मोईन अशरफ ने पत्रकारों से विषेश बातचीत में कहा नशा मुक्ति के लिए भी विशेष दुवाएं मांगी गई है साथ सभी से अपील भी है कि जो लोगों को इसकी लत लग गई है,वे वें अपनी आदतों को सुधारें और अपने परिवार का सही ढंग से पालन पोषण करें साथ ही उन्होंने कहा हमारी सभी लोगों और खासकर समाजसेवियों से अपील है,

कि वे इस काम में हिस्सा लेते हुए युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर इसे रोकने में सहयोग करें, उक्त अवसर पर मुख्य रूप से मौजूद रहे साथ ही समस्त खानवादे, खानकाहे हुसैनिया अशर्फियां के समस्त सदस्यगण उपस्थिति रहे साथ ही दरगाह कमेटी केसैय्यद अज़ीज़ अशरफ, सैय्यद फैजान अशरफ चांद मियां, सैय्यद ख़ालिक़ अशरफ, मुस्हाब अज़ीम, फिरोज अहमद सैय्यद मेराजुद्दीन अशरफ़, जिसके साथ मौजूद रहे सैय्यद जामी अशरफ जामी मियां सैय्यद रईस अशरफ,

मौलाना सैय्यद जावेद अशरफ, सैय्यद हसन अशरफ, अली अशरफ, सैय्यद जाहगीर गुड्डू मियां, अशरफ, सैय्यद खालीक़ अशरफ, सैय्यद मोहम्मद अशरफ बड़े बाबू,

सैय्यद शफीक अशरफ पप्पू मियां, सैय्यद नैय्यर अशरफ, सैय्यद नूर, मेराज बसखारी, सैय्यद अदनान हसन, सैय्यद सुल्तान अशरफ, हुसैन अशरफ,सरफ़राज़ खादिम,

फिरोज खादिम, फैज़ान खान, जुहैब खान, सैय्यद आले मुस्तफा छोटे बाबू, इमरान मुजाविर सहित समस्त खानवादे अशरफिया के लोग सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं हजारों की संख्या में जायरीन मौजूद रहे।

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