रिपोर्ट – बीएच यादव
हाटा शुगर मिल और अन्नदाताओं भूमि अधिग्रहण का मामला जोर पकड़ता जा रहा है।
कुशीनगर : मर जाऊंगा लेकिन अपनी जमीन नहीं दूंगा” एथेनॉल फैक्ट्री हाटा तहसील क्षेत्र अन्तर्गत ढ़ाढ़ा बुर्जुग हरपुर” जिसे परसीमन में नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 में बदल दिया गया है। बतादे स्वामी विवेकानंद नगर के लोगों की जमीन हाई कोर्ट के आदेश पर न्यू इंडिया अवध सूगर मिल एथेनॉल की फैक्ट्री लगाने के लिए अधिग्रहण किया जा रहा है कृषि उपजाऊ भूमि को अधिग्रहण करने का लगातार प्रयास जारी है।
जबकि ग्रामीण सर्किल रेट पर अपनी जमीन बिरला शुगर मिल को नहीं देना चाहते। न्यू इंडिया सुगर मिल द्वारा एथेनॉल की डिस्टीलरी लगाने के लिए सन 2009 मे ढाढ़ा बुर्जुग के हरपुर गांव के लगभग 92वे अन्नदाताओं की 14-67 हेक्टेयर जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहण किया गया था। उनमे से 89 किसानो ने उच्च न्यायालय मे अपील दाखिल कर अपनी जमीन देने से मना किया था।
लेकिन 2022 मे हाईकोर्ट ने किसानो की अपील को खारिज कर चीनी मिल के पक्ष मे फैसला दे दिया। दो-दो बार पंचायत होने के बाद प्रशासन जमीन हथियाने के लिए बल का प्रयोग करने को कह रहा है।
उधर गांव वाले अपनी जमीन बचाने के लिए हर स्तर पर उतरने को तैयार हैं गांव के ही निवासी रणजीत सिंह ने बताया कि बिरला शुगर मिल हम लोगों की जमीन में लगी है। अब एथेनॉल फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन का विस्तार किया जा रहा है। जिससे हमारी थोड़ा बहुत बची-कुची जमीन है। अब वो भी हथियाने का प्रयास किया जा रहा। हम लोगों की उपजाऊ जमीन है जिसे हम देना नहीं चाहते हैं।
क्योंकि मिल द्वारा जो जमीन का मुआवजा सर्किल रेट से दिया जा रहा है वह बहुत ही कम है। अगर मिल हम लोगो को मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा देने पर तैयार होगा तभी हम लोग अपनी जमीन मिल को दे देंगे या मिल प्रशासन हमें जमीन के बदले उपजाऊ जमीन दे देंगे।
गांव के ही सुमित्रा देवी ने बताया कि हम लोग अपनी जमीन किसी भी कीमत पर फैक्ट्री लगाने के लिए नहीं देंगे। अगर जमीन दे देंगे तो खाएंगे कहां से। हमें पैसा नहीं चाहिए हमें जमीन के बदले उपजाऊ जमीन चाहिए। पुष्पा देवी ने बताया कि जो जमीन एथेनॉल फैक्ट्री लगाने के लिए अधिग्रहण की जा रहा है वह जमीन हमारे घर के नीव से सटे है। अगर मिल लग गया तो हम लोगों का गुजर -बसर कैसे होगा। हमारी तो पूरी जमीन ही मिल में चली जा रही है। हम अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे ।
उन्होंने कहा कि हम लोग जनप्रतिनिधियों से भी अपनी जमीन बचाने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं झब्बू लाल ने बताया कि जो जमीन मिल अधिग्रहण कर रहा है, उस जमीन की आज के डेट में मार्केट रेट कम से कम 12 लाख रुपया कट्ठा की कीमत है और सरकार हमें मात्र डेढ़ लाख रुपया कट्ठा ही कीमत दे रही है। हम तो उस जमीन में भूसा रखने के लिए मकान भी बनवाए हुए हैं। हम अपनी जमीन नहीं देंगे। अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे रामनिवास ने बताया कि एक बार हम लोग अपनी जमीन चीनी मिल के लिए दे चुके हैं।
अगर दोबारा फैक्ट्री के लिए जमीन दे दिए तो हम लोग भूमिहीन हो जाएंगे ऐसे में हमारे बच्चे खाने बिना मर जाएंगे हम लोग जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। शांतिमय तरीके से अपनी लड़ाई लड़ेंगे गांव के ही विष्णु दयाल समेत दर्जनों की संख्या में जुटे लोगों ने स्पष्ट तौर से कहा कि हम अपनी जमीन सर्किल रेट पर किसी भी कीमत पर एथेनॉल फैक्ट्री लगाने के लिए नहीं देंगे।
सरकार हमें जो जमीन का मार्केट रेट चल रहा है उस हिसाब से कीमत दे या जमीन के बदले जमीन दे तब हम अपनी जमीन देंगे अन्यथा हम लोग अपनी उपजाऊ भूमि को एथेनॉल की फैक्ट्री लगाने के लिए नही देंगे जबकि जमीन अधिग्रहण के मामले में स्थानीय तहसील प्रशासन दो बार गांव के लोगों के साथ बैठक करके समझने की कोशिश कर चुका है लेकिन नतीजा सिफर निकला ।
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