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दावत-ए-इस्लामी इंडिया का हज तरबियती इज्तिमा आयोजित,हाजियों को दी गई विषेश ट्रेनिंग!

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रिपोर्ट News10plus|                          अम्बेडकरनगर |टांडा|दावत-ए-इस्लामी इंडिया की जानिब से टांडा में हज पर जाने वाले आज़मीन-ए-हज के लिए एक विशेष हज तरबियती इज्तिमा का आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जामियातुल मदीना फ़ैज़ाने हाफ़िज़-ए-मिल्लत, नई आबादी तलवापार (गौसिया मस्जिद के पास) स्थित मदरसे में किया गया, जहां इस वर्ष हज पर जाने वाले यात्रियों को विस्तार से ट्रेनिंग दी गई।

कार्यक्रम की शुरुआत रविवार 5 अप्रैल को सुबह 10 बजे कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। इसके बाद हज के दौरान मक्का-मदीना शरीफ़ में इबादत, जियारत, रहने-ठहरने और विभिन्न अरकान को

सही तरीके से अदा करने की जानकारी दी गई। साथ ही हज की अहमियत, फज़ीलत और मकबूल हज की विशेषताओं पर भी विस्तार से रौशनी डाली गई।

हज ट्रेनर टांडा के निगरान हाजी मुज़फ़्फ़र सफी अत्तारी और अयोध्या जीएनआरएफ के डिविजन मैनेजर हाजी डॉक्टर शराफत तौहीद अत्तारी ने

हज यात्रियों को घर से रवाना होने से लेकर हज मुकम्मल कर वापस लौटने तक आने वाले विभिन्न मसलों और उनके समाधान के बारे में जानकारी दी।

ट्रेनिंग के दौरान हज की नियत करने का तरीका बताया गया तथा तलबिया — “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” का अभ्यास भी कराया गया। इसके साथ ही हज में ले जाने वाले जरूरी सामानों की सूची, यात्रा की तैयारी और एहतियाती उपायों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया।

उलेमा ने हज की अहमियत बताते हुए पैग़ंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान बयान किया कि मकबूल हज करने वाला व्यक्ति ऐसा होता है जैसे वह आज ही अपनी मां के पेट से पैदा हुआ हो और उसके तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

इस्लामी बहनों (औरतों) के लिए अलग से मदरसे के बेसमेंट में पर्दे के एहतमाम के साथ विशेष तरबियती सत्र आयोजित किया गया, जहां महिलाओं को हज से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के अंत में दरूद-ओ-सलाम पढ़ा गया, हाजियों को भोजन कराया गया तथा किताब ‘रफ़ीकुल हरमैन’ भी तकसीम की गई।

हाजियों ने अपने तस्सुरात साझा करते हुए बताया कि ट्रेनिंग बेहद उपयोगी रही और मक्का-मदीना की हाज़िरी के तरीके को आसान अंदाज़ में समझाया गया। उन्होंने दावत-ए-इस्लामी इंडिया के इस प्रयास की सराहना की।

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