रिपोर्ट News10plus| टांडा अम्बेडकरनगर। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाओं के तहत जनपद में नाली और सड़क निर्माण कार्य तेज़ी से कराए जा रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर इन कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी क्रम में विकास खंड टांडा क्षेत्र अंतर्गत एनटीपीसी टांडा पुलिस चौकी के सामने से ग्राम कटरिया तक लगभग आधा किलोमीटर की दूरी में
हो रहे नाली निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। यह कार्य धर्मेंद्र वर्मा द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जहां नाली को सीधा (स्टेट) बनाया जा सकता था, वहां अनावश्यक रूप से उसे ज़िग-ज़ैग और घुमावदार बना दिया गया है, जिससे न सिर्फ तकनीकी मानकों का उल्लंघन हो रहा है बल्कि क्षेत्र की सुंदरता भी प्रभावित हो रही है।
नाली के फर्श निर्माण और सरियों के जाल (रिइनफोर्समेंट) में भी गुणवत्ता का अभाव साफ देखा जा सकता है। निर्माण में उपयोग हो रहा मटेरियल भी नियमानुसार नहीं है, जिससे कार्य की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि नाली के बीच में पड़ रहे ट्रांसफार्मर को हटाने के लिए बिजली विभाग को कोई लिखित सूचना तक नहीं दी गई। इसके बजाय नाली को ही घुमावदार बना दिया गया, जो साफ तौर पर लापरवाही और नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और पोस्ट वायरल हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन साधे हुए हैं।
आरोप यह भी है कि निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदार को सत्ता पक्ष के साथ-साथ कुछ प्रभावशाली और रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो रही है।
और तो और, इस जनसमस्या को उजागर करने वाले पत्रकारों को भी तमाम तरह से डराने-धमकाने की कोशिश भी की जा रही है। मौके पर मौजूद ठेकेदार के लोग डर से खौफ जनसमस्या उजागर करने वाले कॉरस्पॉडेंट का ही
वीडियो बनाकर अपने रसूखदारों के पास भेजे जा रहे और उन्हें दबाव में लेने का प्रयास किया जा रहा है, यहां तक कि वहां मौजूद ठेकेदार का आदमी किसी को फोन कर अन्य किसी व्यक्ति से बात कराकर धमकी भी दिलाने की कोशिशें की जा रही है।
यह घटना न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से भ्रष्टाचार को उजागर करने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
बहरहाल, यदि इसी तरह निर्माण कार्यों में अनियमितताएं जारी रहीं, तो यह न केवल सरकारी राजस्व की भारी हानि होगी, बल्कि आम जनता को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।




