Welcome to   Click to listen highlighted text! Welcome to

अम्बेडकरनगर में मोहर्रम की शुरुआत: चांद दिखते ही गूंज उठे इमामबाड़े, ‘या हुसैन’ की सदाओं से माहौल हुआ गमगीन

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Share this article

रिपोर्ट:News10plusएडिटर मोहम्मद राशिद-सैय्यद| अम्बेडकरनगर। मोहर्रम का चांद नजर आते ही जनपद भर के इमामबाड़ों, इमाम चौकों और अज़ाखानों में मजलिस, मातम, नजर-नियाज़ तथा सबील-ए-सकीना का सिलसिला शुरू हो गया। चारों ओर “या हुसैन, या हुसैन”की सदाएं गूंजने लगीं और ग़म-ए-हुसैन का माहौल छा गया। इसके साथ ही कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित होने वाली धार्मिक सभाओं और मातमी कार्यक्रमों का दौर प्रारंभ हो गया।

मोहर्रम इस्लामी वर्ष का पहला और अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। लगभग 1400 वर्ष पूर्व कर्बला की धरती पर हक, इंसानियत, न्याय और सत्य की रक्षा के लिए

अमर शहीद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम तथा उनके 72 साथियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी कुर्बानी की याद आज भी पूरी दुनिया में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है।

मोहर्रम के दौरान जगह-जगह सबीलें लगाई जाती हैं, जहां लोगों को शुद्ध एवं ठंडा पेयजल तथा अन्य खाद्य सामग्री वितरित की जाती है। मजलिसों और मातमी आयोजनों में

शामिल होने वाले लोगों के लिए नजर-नियाज़ और लंगर का भी विशेष प्रबंध किया जाता है। यही कारण है कि इस पवित्र महीने में सेवा, त्याग और मानवता की मिसाल देखने को मिलती है।

शिया समुदाय मोहर्रम की पहली तारीख से लेकर दो माह आठ दिन तक ग़म-ए-हुसैन में मशगूल रहता है। इस अवधि में विवाह, उत्सव और अन्य खुशी के कार्यक्रमों से परहेज किया जाता है तथा समुदाय के लोग काले वस्त्र धारण कर कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

जनपद अम्बेडकरनगर के विभिन्न क्षेत्रों, तहसीलों और ग्रामीण इलाकों में मजलिसों और मातम का सिलसिला शुरू हो चुका है। विशेष रूप से टांडा क्षेत्र के मोहल्ला

मीरानपुरा, राजा सैय्यद मोहम्मद रज़ा कोट में मंजिलों और जुलूसों का सिलसिला जारी, हयातगंज, सकरावल एवं शिया टोला सहित अन्य स्थानों पर धार्मिक आयोजन जारी हैं, जहां बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होकर कर्बला के शहीदों को याद कर रहे हैं।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार कर्बला का संदेश केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, न्याय, मानवता और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष की सार्वभौमिक मिसाल है।

हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यही कारण है कि सदियों बाद भी उनका संदेश और उनकी कुर्बानी पूरी दुनिया के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

मोहर्रम का यह पवित्र महीना लोगों को त्याग, सेवा, धैर्य, मानवता और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देता है। कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित होने वाले कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों को भी इंसाफ और इंसानियत की अहमियत से रूबरू कराते रहेंगे।

Responsive Picture Carousel
Welcome to   Click to listen highlighted text! Welcome to
Click to listen highlighted text!
Click to listen highlighted text!