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कर्बला के मिशन को आगे बढ़ाने में महिलाओं की अहम, भूमिका बीबी ज़ैनब के सब्र और कुर्बानी को याद किया!
रिपोर्ट: News10plus| अम्बेडकरनगर। टांडा नगर के मोहल्ला मीरानपुरा में स्थित राजा के मैदान में बने हुसैनी हॉल में मरहूमा तराब़ ज़ैहरा बिंते नईम हुसैन के इसाले सवाब के लिए मजलिस का आयोजन किया गया।

उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी और कर्बला की कुर्बानी इंसानियत, हक़ और सच्चाई के लिए एक महान संदेश है। मौलाना ने इस्लाम में महिलाओं के महत्वपूर्ण स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि —
कर्बला के बाद हज़रत बीबी ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा ने हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने अदम्य सब्र, साहस और दृढ़ता से कर्बला के पैगाम को दुनिया तक पहुंचाया।
“मोहर्रम की फिक्र महिलाओं को सबसे ज्यादा होती है” मौलाना सैय्यद मोहम्मद अकील”
मौलाना सैय्यद मोहम्मद अकी़ल ने मोहर्रम के दौरान महिलाओं की अकीदत और उनकी भूमिका का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि मोहर्रम आने से कई दिन पहले से ही महिलाओं में इसकी तैयारी और फिक्र शुरू हो जाती है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अदबो-एहतेराम और पूरी अकीदत के साथ मोहर्रम मनाती हैं और बीबी फात्मा ज़ैहरा सलामुल्लाह अलैहा को उनके लाल इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और कर्बला के बहत्तर शहीदो का पुरसा पेश करती हैं।
उन्होंने कहा कि यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल महिलाओं में ही मोहर्रम की अकीदत है, पुरुष भी पूरी श्रद्धा के साथ मोहर्रम मनाते हैं, लेकिन उनके नजरिए में महिलाओं की अकीदत और फिक्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
मौलाना ने कहा कि कर्बला की घटना में महिलाओं ने भी अहम किरदार निभाया। हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की शहादत के बाद बीबी ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा समेत कर्बला में मौजूद महिलाओं ने —
अत्याचारों के बावजूद हिम्मत और सब्र का परिचय दिया तथा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के मिशन और पैगाम को आगे पहुंचाने का कार्य किया।
कर्बला के 72 शहीदों के मसायब सुनकर नम हुईं आंखें
मजलिस के दौरान मौलाना ने कर्बला के बहत्तर शहीदों की शहादत और उन पर यज़ीद की फौज द्वारा ढाए गए मसायब को बयान किया। मसायब का जिक्र होते ही मजलिस में मौजूद मोमिनीन की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल गमगीन हो गया।
मजलिस में मौजूद अकीदतमंदों ने भावुक होकर बीबी फात्मा ज़ैहरा सलामुल्लाह अलैहा को उनके लाल हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और कर्बला के बहत्तर शहीदो का पुरसा पेश किया।
अंत में मरहूमा तराब़ ज़ैहरा बिंते नईम हुसैन की मग़फिरत के लिए सूरह-ए-फातेहा की तिलावत की गई और दुआ-ए-मग़फिरत के लिए दुआ की गई।
मजलिस के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे और पूरी मजलिस धार्मिक अदबो-ए-एहतेराम एवं गमगीन माहौल में सम्पन्न हुई।




