रिपोर्ट:News10plusएडिटर| अम्बेडकरनगर। जनपद के बसखारी में स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत सैय्यद मख़दूम अशरफ जहाँगीर सिमनानी (दरगाह किछौछा शरीफ) आस्था, रूहानियत और इंसानियत का ऐसा केंद्र है,
जहां देश-विदेश के कोने-कोने से लाखों जायरीन दिली सुकून, रूहानी इलाज और अपनी मुरादों की दुआ लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस दरबार से अनगिनत लोगों को रूहानी राहत और शिफ़ा हासिल हुई है।
हर वर्ष 24 मोहर्रम से 30 मोहर्रम तक उर्स के दौरान यहां जायरीनों का विशाल जनसैलाब उमड़ता है। इस दौरान सज्जादानशीनों द्वारा दरगाह पर चादरपोशी, गागर की रस्म और विशेष दुआओं का सिलसिला चलता है।

इसी दरगाह की व्यवस्था संभाल रहे दरगाह मुतवल्ली एवं सज्जादानशीन सैय्यद मोहीउद्दीन अशरफ अपनी सादगी, विनम्रता और खिदमत के जज़्बे के कारण लोगों के बीच विशेष पहचान रखते हैं।

वहीं सैय्यद मोहीउद्दीन अशरफ बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं। उनका पूरा ध्यान केवल इस बात पर रहता है कि दरगाह आने वाले किसी भी जायरीन को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें रूहानी राहत मिल सके।

और आवश्यकता पड़ने पर ताबीज़ भी प्रदान करते हैं। यही वजह है कि दूर-दराज़ से आने वाले लोग उनसे रूहानी मार्गदर्शन प्राप्त करने पहुंचते हैं। दरगाह से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारियां, बड़ी संपत्तियां और प्रशासनिक दायित्व होने के बावजूद
ऐसे दौर में, जब अधिकांश लोग धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं को सफलता का पैमाना मानते हैं, वहीं सैय्यद मोहीउद्दीन अशरफ का जीवन यह संदेश देता है कि इंसान की सबसे बड़ी दौलत उसकी सेवा, सादगी, इंसानियत और लोगों की दुआएं होती हैं।
नोट: यह लेख उपलब्ध जानकारी एवं जनचर्चाओं के आधार पर तैयार किया गया फीचर लेख है— इस लेख को News10plus द्वारा केवल दरगाह मुतवल्ली एवं सज्जादानशीन सैय्यद मोहीउद्दीन अशरफ के सादगीपूर्ण जीवन, सरल स्वभाव, सेवा भावना और जायरीनों के प्रति उनके समर्पण को प्रस्तुत करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय की आलोचना करना, किसी की तुलना करना अथवा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। यदि किसी तथ्य पर किसी पक्ष को कोई आपत्ति या स्पष्टीकरण देना हो, तो News10plus उसका सम्मानपूर्वक स्वागत करेगा।




