मौलाना की तकरीर, नौहा-मातम, सबील-ए-सकीना और कुरानदाज़ी के साथ परंपरागत तरीके से सकुशल संपन्न हुआ जुलूस-ए पाँच सफ़र।

रिपोर्ट:News10plusएडिटर मोहम्मद राशिद(सैय्यद) अम्बेडकरनगर। जनपद की तहसील टांडा में मोहर्रम के बाद सफ़र माह में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक जुलूस-ए पाँच सफ़र इस वर्ष भी परंपरागत धार्मिक आस्था, अनुशासन और अकीदत के साथ सकुशल संपन्न हुआ।
यह जुलूस टांडा नगर के मोहल्ला मीरानपुरा में स्थित राजा मोहम्मद रज़ा के मैदान से बरामद हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में मोमिनीन/ जायरीन शामिल हुए। जुलूस के बरामद होने से पूर्व आली जनाब मौलाना सैय्यद गुलाम मुर्तज़ा (चुन्नू क़िब्ला) अरसांवा ने —

इसके बाद अंजुमन अब्बासिया सकरावल शिया टोला, अंजुमन मेंहदियां बेशीर ग्रुप जफराबाद (जलालपुर), अंजुमन हैदारिया कदीम अब्दुल्लापुर तथा अंजुमन जुल्फेकारिया ग्राम खासपुर ने नौहा-ख्वानी और मातम कर कर्बला के 72 शहीदों को पुर्सा पेश किया।

वहीं जुलूस के दौरान बीच बीच में आली जनाब मौलाना सैय्यद आसिफ़ हसन टांडवी ने कर्बला के 72 शहीदों के मसायब बयान किए, जिसे सुनकर जुलूस में पहुंचे जायरीन/मोमिनीन भावुक हो उठे और नम आंखों से बीबी फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) की बारगाह में पुर्सा पेश किया।

नगर पालिका परिषद टांडा की अध्यक्ष श्रीमती शबाना एवं फ़न गार्मेंट्स नजमी नवाज़ की ओर से सबील-ए-सकीना की अकीदतमंदी में जायरिनों के लिए शुद्ध ठंडा पानी, शर्बत, चाय की व्यवस्था की गई।

प्रत्येक वर्ष अंजुमन हुसैनिया मीरानपुरा (रजिस्टर्ड), के समस्त सदस्यगणों और नौहा-ख्वान इसरार हुसैन व मोहल्ला मीरानपुरा एवं समस्त अहल-ए-टांडा की अकीदतमंदी से आयोजित किया जाता है।
यहां से एक बार फिर से बताते चलूं जुलूस समापन के बाद परंपरा के अनुसार जिस तरह से कुरानदाज़ी कराई जाती थी उसी तरह से इस बार भी कराई गई। इसमें एक छोटे बच्चे से पर्ची निकालवाई गई जिस पर्ची के आधार पर
अंजुमन जुल्फेकारिया (ग्राम खासपुर) को अलम मिला, जबकि अन्य सभी अंजुमनों को भी एक-एक इस्लामिक फोटो के साथ फ्रेम करवाई गई शील्ड हदियां में दी गई जो सदियों की परंपरा के अनुसार किया गया। इस पूरे आयोजन में धार्मिक सौहार्द, अनुशासन और अकीदत का अद्भुत संगम देखने को मिला।
जुलूस में टांडा कोतवाली के पुलिस अधिकारी और महिला कांस्टेबल एंव पुलिस कर्मी जायरीनों और जुलूस की सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह मुस्तैद रही जुलूस सकुशल अपने समय अनुसार नगर में भ्रमण करते हुए वापस राजा मोहम्मद रज़ा मैदान में सपन्न हुआ।




