रिपोर्ट एडिटर मोहम्मद राशिद-सैय्यद| अम्बेडकरनगर। जनपद सहित समस्त ग्रामीण व तहसील क्षेत्रों में रमजान-उल-मुबारक के पवित्र महीने की ’23वीं शब-ए-कद्र’ अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई।

इस मुकद्दस रात के अवसर पर शिया समुदाय के लोगों ने पूरी रात जागकर नमाजें अदा कीं और खुदा की बारगाह में दुआएं मांगीं।
मीरानपुरा राजा मोहम्मद रज़ा मस्जिद में पढ़ी गई 23वी शब-ए-कर्द की नमाज़!

टांडा तहसील क्षेत्र के मीरानपुरा स्थित राजा मोहम्मद रज़ा मस्जिद में 23वीं शब-ए-कर्द की नमाज़ अदा की गई यहाँ शिया धर्म के मौलाना सैय्यद रज़ा हसन ने मौजूद मोमीनिन को 06 दिन की (कज़ा-ए-उम्री) नमाज़ पढ़ाईं और विशेष दुआएं करवाईं।
मस्जिद में मौजूद जायरीन ने पूरी रात तस्बीह, तिलावत-ए-कुरान और दुआ-ए-जौशन-ए-कबीर के साथ व्यतीत की।

अफ़ज़ल रात का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान की 23वीं शब को सबसे ‘अफ़ज़ल’ (श्रेष्ठ) रातों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के लिए जन्नत के दरवाजे खोल देता है और सच्चे दिल से मांगी गई हर जायज दुआ कुबूल होती है।

मौलाना सैय्यद रज़ा हसन ने बताया कि यह रात गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह की रहमत हासिल करने की रात है।
सहरी के बाद अदा की गई नमाज़-ए-फ़ज्र
इबादत का यह सिलसिला पूरी रात चलता रहा। भोर होने पर मस्जिद में ही अकीदतमंदों ने सामूहिक रूप से सहरी की, जिसके बाद नमाज़-ए-फ़ज्र (सुबह की नमाज़) अदा कर मुल्क में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी गई।
प्रमुख बिंदु:
जनपद की सभी तहसीलों में रहा आध्यात्मिक माहौल।मौलाना सैय्यद रज़ा हसन ने संपन्न कराईं विशेष नमाज़ें।
गुनाहों की माफी और मुल्क की तरक्की के लिए उठे हाथ। “23वीं शब-ए-कर्द” को सही वर्तनी “शब-ए-कद्र” में बदला गया है।




