रिपोर्ट News10plus एडिटर| टांडा अम्बेडकरनगर। गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिए पहचाने जाने वाले बुनकर नगरी टांडा में इस बार होली की खुशियों पर ग्रहण लग गया। रंगों के पर्व पर निकलने वाला पारंपरिक जुलूस केवल परंपरा निभाने तक सीमित रह गया,
क्योंकि एक दिन पहले ही नगर के चर्चित समाजसेवी व लकड़ी व्यवसायी सुरेंद्र मांझी की निर्मम हत्या से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। इसी बीच होली के दिन ग्राम अकूतपुर में एक और शव मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया।
बहरहाल दो अलग-अलग घटनाओं ने दो परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। खास होली के दिन प्रातः में पुलिस को ग्राम अकूतपुर नहर के पास एक व्यक्ति का संदिग्ध परिस्थितियों में शव
मिलने की सूचना पुलिस को मिली हालांकि टांडा कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया और जांच में जुट गई। बहरहाल स्थिति की
गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है, हालांकि पुलिस का दावा है कि उन्होंने घटना में शामिल अभियुक्तों तक पहुंचने में काफी हद तक कामयाबी हासिल कर ली है,
प्राप्त जानकारी सूत्रों के हवाले से टांडा में ताबड़तोड़ घटित घटनाओं के मद्देनजर टांडा कोतवाली में एक बड़े उच्च अधिकारी, ने लगभग एक घंटे से अधिक टांडा कोतवाली में कैंप किया। जहां उन्होंने एसडीएम एवं एडिशन एसपी,
क्षेत्राधिकारी, और कोतवाली प्रभारी के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया। और पुलिस को नगर व आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश के साथ साथ कई आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिया।
बहरहाल होली के जुलूस में पुलिस प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही जुलूस अपने परंपरागत मार्गो से होता हुआ वापस अपने स्थान पर पहुंचकर सकुशल सम्पन्न हुआ।
होली जुलूस के मौके पर हर वर्ष की तरह इस बार भी होली जुलूस में शामिल लोगों के स्वागत की परंपरा निभाई गई। वही हयातगंज टांडा में स्थित फाइन फिलिंग पैट्रोल पंप के सामने आरिफ, व नबी अहमद टी स्टाल की तरफ से इस वर्ष भी
मिष्ठान और जल सहित खाने पीने वाली अन्य खाद्य सामग्रियों से होली जुलूस में शामिल लोगों का भव्य स्वागत अभिनंदन किया गया। हयातगंज तिराहे पर सामाजिक संस्था पंख उड़ान एक उम्मीद की ओर से मिष्ठान व जल पिला कर स्वागत किया गया,
बहरहाल जो कुछ भी हो होली का जुलूस निकालना पुरानी परम्परा है जिसके लिए जरूरी है लेकिन इस बार होली के जुलूस में पूर्व के जैसा इस वर्ष उत्साहपूर्ण माहौल बिल्कुल नहीं दिखा। जुलूस में बहुत ही कम लोग शामिल नज़र आए।
बहरहाल, जिस अम्बेडकरनगर में होली हमेशा भाईचारे और सौहार्द की मिसाल रही है, वहां इस बार रंगों से ज्यादा लोगों के आंसुओं की चर्चा होती रही।




