“मीरानपुरा की मजलिस में छलके गम के आँसू, कर्बला की याद में हुआ नौहा-मातम”
09 मोहर्रम की मजलिस में कर्बला के शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि, मौलाना गुलाम मुर्तज़ा ने किया संबोधित किया!

मजलिस में बड़ी संख्या में मोमिनीन एवं अज़ादारों ने शिरकत कर शोहदाए कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया। मजलिस को संबोधित करते हुए आली जनाब मौलाना सैय्यद गुलाम मुर्तज़ा उर्फ चुन्नू किबला ग्राम अरसावां ने —
अपना उत्तराधिकारी बनाया। मौलाना ने हज़रत अली की बहादुरी, खैबर के किले की घटना तथा उनके वैज्ञानिक एवं सामाजिक विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सदियों पहले ऐसी अनेक बातों की ओर संकेत किया था जिन्हें आज आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार कर रहा है।

कर्बला की मर्मस्पर्शी घटनाओं का वर्णन सुनकर मजलिस में उपस्थित अज़ादार गमगीन हो उठे और नम आंखों से बीबी फातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को उनके लाल अमर शहीद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का पुर्सा पेश किया।

सैय्यद शाहिद रज़ा एडवोकेट, सैय्यद अज़हर अली, सैय्यद कम्मू, सैय्यद आसिफ हसन, सैय्यद शफी हसन, सैय्यद साकिर हुसैन (नम्मू), सैय्यद अहमद, सैय्यद राशिद, सैय्यद अहमर, साजिद हुसैन,

गुलफाम हसन, आलम, इसरार हुसैन, आमिर, सैय्यद समर हसन, सैय्यद सरवर हुसैन, सैय्यद हसन, कर्रार हुसैन सहित मीरानपुरा एवं हयातगंज की संयुक्त अंजुमनों के सदस्यगण उपस्थित रहे।





