रिपोर्ट News10plus| अम्बेडकरनगर ! टांडा नगरक्षेत्र के ताज टाकीज़ तिराहे पर स्थित सोगरा बीबी के इमामबाड़े में मरहूमा निसार बानो बिन्ते सगीर हसन की चालीसवें कि मजलिस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा एवं अकीदत के साथ किया गया।

मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने अपने संबोधन में हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि जब इंसान पर मुसीबत या आपदा आती है तो वह अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तलाश करता है।

मौलाना ने कहा कि हज़रत नूह का बेटा भी पहाड़ों की ओर भागा, लेकिन वह सुरक्षित नहीं रह सका, जबकि कश्ती में सवार सभी लोग बच गए। इससे यह सबक मिलता है कि इंसान के लिए अल्लाह के हुक्म और हिदायत पर यकीन करना जरूरी है।

यह मजलिस एक मरहूम के इसाले सवाब के लिए आयोजित की गई है, मगर इसमें अहलेबैत का जिक्र हो रहा है और यही मुकम्मल दीन की पहचान है।इसके बाद उन्होंने कर्बला में शहीद हुए बहत्तर शहीदों के दर्दनाक वाकये को बयान किया,
जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद जायरीन गमगीन हो गए। उपस्थित लोगों ने नम आंखों से बीबी फात्मा ज़हरा (स.अ.) को उनके लाल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) का पुर्सा पेश किया।
मजलिस के अंत में मरहूमा निसार बानो की मगफिरत के लिए सूरह फातिहा पढ़ा गया और मुल्क सहित पूरी दुनिया में अमन चैन कायम रहने की विशेष दुवॉए के साथ मरहूमा के लिए दुआ की गई।
मजलिस के बाद पहुंचे जायरीनों के लिए नज़र-ए-मौला के तौर पर भोजन की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम का आयोजन मरहूमा के बेटे आशी द्वारा किया गया,
जिसमें क्षेत्र सहित दूर-दूर से आए लोगों ने पहुंचकर उनके बेटे को उनकी मॉ का पुर्सा पेश किया।और मरहूमा के लिए दुआएं कीं।




