सुभाष चंद्र बोस नेताजी की जयंती पर नागरिक सुरक्षा का बड़ा संदेश; हवाई हमले और रेस्क्यू ऑपरेशन का हुआ सजीव प्रदर्शन
रिपोर्ट – एडिटर मोहम्मद राशिद – सैय्यद| अम्बेडकरनगर (टांडा): आपातकाल की स्थिति में खुद को कैसे सुरक्षित रखें और दुश्मन के रडार को कैसे मात दें? इसका जीवंत उदाहरण आज एनटीपीसी टांडा परिसर में देखने को मिला।
उत्तर प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों और जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर शुक्रवार शाम 06:00 बजे ‘ब्लैक आउट’ मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया।
सायरन की गूँज और ‘ब्लैक आउट’ का रोमांच
जैसे ही शाम के छह बजे, हवाई हमले की चेतावनी वाले सायरन की गूँज के साथ पूरा एनटीपीसी परिसर अंधेरे में डूब गया।
यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा के तहत की गई एक सुनियोजित ड्रिल थी। इस दौरान निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर फोकस किया गया:
त्वरित निकासी: सायरन बजते ही निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर पहुँचने का अभ्यास। अग्निशमन कार्रवाई: आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की चुस्ती का प्रदर्शन। रेस्क्यू ऑपरेशन: मलबे या विषम परिस्थितियों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का सजीव मंचन।
फर्स्ट एड: स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार देने की प्रक्रिया।
”तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है” – कार्यकारी निदेशक
एनटीपीसी टांडा के कार्यकारी निदेशक जयदेव परिदा ने इस सफल आयोजन पर सभी विभागों की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा:
“आपदा प्रबंधन केवल एक संस्थागत प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। इस तरह के अभ्यास हमें किसी भी वास्तविक संकट के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया (Quick Response) के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करते हैं।”
उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ एनटीपीसी के बेहतरीन तालमेल की सराहना करते हुए इसे भविष्य की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य कदम बताया।




