अंजुमन हुसैनिया मीरानपुरा के सदस्यों ने मुतवल्ली राजा सैय्यद काज़िम रज़ा और उनके बेटों के नेतृत्व में राजा मोहम्मद रज़ा कोट में केक काटकर और पटाखे फोड़कर धूमधाम से मनाया जश्ने वेलाद मौला ए – का़यनात हज़रत अली
रिपोर्ट – News10plus – एडिटर मोहम्मद राशिद – सैय्यद। टांडा अम्बेडकरनगर। बीती रात्रि टांडा के मोहल्ला मीरानपुरा राजा कोट में धूमधाम मनाया गया हज़रत अली का जन्मोत्सव इस्लाम धर्म के रचयिता रसूले अकरम सल्ल्लाहू वसल्लम के जानशीन,





जहां से हम आपको विस्तार पूर्वक बताते चलें अली अली इब्ने अबु तालिब का जन्म उर्दू तारीख इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 13 रजब, 23 क़ब्ल-ए-हिजरत (मुताबिक़: लगभग 600 ईस्वी) में हज़रत अली की -पैदाइश:
मक्का-ए-मुक़र्रमा/खाने काबा शरीफ़ में हुआ था। जहां हम आपको उनके जीवन परिचय पर रौशनी डालते हैं, नाम: अली इब्ने अबु तालिब लक़ब: असदुल्लाह (अल्लाह का शेर), मौला-ए-कायनात वालिद: अबू तालिब
वालेदा: फ़ात्मा बिन्तें असद बीवी: सैय्यदा फ़ात्मा ज़ैहरा, औलाद: हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम, हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, बीबी ज़ैनब, उम्मे कुलसूम, हज़रत अली आपने बचपन से ही रसूलुल्लाहू वसल्लम की परवरिश में रहकर इस्लाम की तालीम हासिल की।
तमाम अहम जंगों (बद्र, उहुद, ख़ंदक, ख़ैबर) जंग-ए-ख़ैबर में मरहब को शिकस्त दिया था हज़रत अली को इल्म, इंसाफ़ और तक़वा में बेमिसाल व “बा-बुल-इल्म” (इल्म का दरवाज़ा) कहा जाता है। उनके अक़वाल और ख़ुत्बात आज भी नहजुल बलाग़ा में मौजूद हैं। उनकी शहादत, 21 रमज़ान, 40 हिजरी कूफ़ा (इराक़) में हुई थी।




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