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मीरानपुरा राजा मोहम्मद रज़ा कोट में धूमधाम से मनाया गया मौला-ए- कायनात हज़रत अली का जन्मोत्सव

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अंजुमन हुसैनिया मीरानपुरा के सदस्यों ने मुतवल्ली राजा सैय्यद काज़िम रज़ा और उनके बेटों के नेतृत्व में राजा मोहम्मद रज़ा कोट में केक काटकर और पटाखे फोड़कर धूमधाम से मनाया जश्ने वेलाद मौला ए – का़यनात हज़रत अली 

रिपोर्ट – News10plus – एडिटर मोहम्मद राशिद – सैय्यद। टांडा अम्बेडकरनगर। बीती रात्रि टांडा के मोहल्ला मीरानपुरा राजा कोट में धूमधाम मनाया गया हज़रत अली का जन्मोत्सव इस्लाम धर्म के रचयिता रसूले अकरम सल्ल्लाहू वसल्लम के जानशीन,

उत्तराधिकारी, दामाद-ए-पैग़म्बर हज़रत अली अलैहिस्सलाम/मौला ए कायनात के जन्मोत्सव/जश्ने-विलादत के पावन अवसर पर राजा मोहम्मद रज़ा कोट में धूमधाम से केक काटकर हर्षोल्लास के साथ मनाया गया हज़रत अली का जन्म-दिन
मुतवल्ली राजा सैय्यद काज़िम रज़ा नजमी रज़ा के नेतृत्व में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मौला ए कायनात हज़रत अली का जन्मोत्सव पूरे हर्षोल्लास व श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम शनिवार 03 जनवरी की रात्रि में राजा मोहम्मद रज़ा मैदान, और राजा कोट में आयोजित हुआ,
जहां केक काटकर मौला अली का जन्मदिन मनाया जाएगा। जन्मदिन/जश्ने- ए-विलादत के रूप में बड़े ही अदब-ओ-एहतराम के साथ मनाते है। इस अवसर पर अंजुमन हुसैनिया मीरानपुरा एवं अंजुमन सिपाहे हुसैनी हयातगंज के सदस्यगण शामिल रहते हैं।
उन्होंने बताया कि जश्ने- ए-विलादत के मौजके पर सभी लोग मिलकर केक काटते हैं और खुशी का इज़हार करते हैं। साथ ही अंजुमन के सभी सदस्य एवं नगर के संभ्रांत लोग उपस्थित रहते हैं, इस अवसर नज़रें मौला  ए कायनात हज़रत अली के जन्मदिन पर नज़रों नियाज़ का इंतेजाम किया की जाता है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आपसी भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश भी देता है। उक्त प्रोग्राम के इंतेज़ामकार राजा सैय्यद काज़िम रज़ा/नजमी रज़ा के पुत्र सैय्यद सालिम अब्बास आब्दी, सैय्यद अलीशान आब्दी, सैय्यद रेहान आब्दी के द्वारा किया जाता है।

जहां से हम आपको विस्तार पूर्वक बताते चलें अली अली इब्ने अबु तालिब का जन्म उर्दू तारीख इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 13 रजब, 23 क़ब्ल-ए-हिजरत (मुताबिक़: लगभग 600 ईस्वी) में हज़रत अली की -पैदाइश:

मक्का-ए-मुक़र्रमा/खाने काबा शरीफ़ में हुआ था। जहां हम आपको उनके जीवन परिचय पर रौशनी डालते हैं, नाम: अली इब्ने अबु तालिब  लक़ब: असदुल्लाह (अल्लाह का शेर), मौला-ए-कायनात वालिद: अबू तालिब

वालेदा: फ़ात्मा बिन्तें असद बीवी: सैय्यदा फ़ात्मा ज़ैहरा, औलाद: हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम, हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, बीबी ज़ैनब, उम्मे कुलसूम, हज़रत अली आपने बचपन से ही रसूलुल्लाहू वसल्लम की परवरिश में रहकर इस्लाम की तालीम हासिल की।

तमाम अहम जंगों (बद्र, उहुद, ख़ंदक, ख़ैबर) जंग-ए-ख़ैबर में मरहब को शिकस्त दिया था हज़रत अली को इल्म, इंसाफ़ और तक़वा में बेमिसाल व “बा-बुल-इल्म” (इल्म का दरवाज़ा) कहा जाता है। उनके अक़वाल और ख़ुत्बात आज भी नहजुल बलाग़ा में मौजूद हैं। उनकी  शहादत, 21 रमज़ान, 40 हिजरी  कूफ़ा (इराक़) में हुई थी।

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