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इसाल-ए- सवाब की मजलिस में मौलाना सैय्यद मैहताब हुसैन बलरामपुरी ने रसूले अकरम और जनाबे फात्मा ज़ैहरा के फ़जा़इल पर डाली रोशन!

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मजलिस का आयोजन मीरानपुरा राजा मोहम्मद रज़ा कोट में स्थित इमाम बारगाह में हुआ।

रिपोर्ट News10plus एडिटर मोहम्मद राशिद  – सैय्यद
अम्बेडकरनगर ! टांडा। मोहल्ला मीरानपुरा, राजा मोहम्मद रज़ा कोट में स्थित इमाम बारगा़ह में राजा सैय्यद मोहम्मद रज़ा इब्ने सैय्यद अली हुसैन के इसाले सवाब की मजलिस को संबोधित किया प्रसिद्ध आलिम मौलाना सैय्यद मैहताब हुसैन बलरामपुरी ने।
मौलाना ने मिम्बरे-रसूल से खे़ताब फ़रमाते हुए कहा कि

इस्लाम के मुस्तफ़ा-ए-आलम, रसूले अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.व.) का मरतबा तमाम आलम में बेमिसाल है। उन्होंने अपने जीवन कॉल में अपनी अज़ीम बेटी जनाबे फ़ातिमा ज़ैहरा सैय्यदतुन-निसा -ए -आलम

(स.अ.), जिन्हें सिद्दीक़ा-ए-ताहेरा का ख़िताब हासिल है, जिनसे उन्होंने बेपनाह मोहब्बत फरमाई। रसूल-ए-अकरम (स.अ.व.) उनके आने पर खड़े होकर इस्तक़बाल किया करते थे।

मौलाना ने कहा कि अफ़सोस, वक़्त के साथ ऐसे हालात भी आए कि जनाबे फ़ातिमा (स.अ.) और हज़रत अली (अ.स.) पर नाइंसाफ़ियाँ व ज़ुल्म ढाए गए। जनाबे फात्मा ज़ैहरा (स.अ.) के घर का जला हुआ दरवाज़ा उन पर गिराया !

गया और हज़रत अली (अ.स.) को भी तकलीफ़ें पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि खैबर, ख़ंदक और सैकड़ों मैदानों में फ़तह
हासिल करने वाले शेर-ए-ख़ुदा हज़रत अली (अ.स.) की

मिसालें दुनिया भर में मौजूद हैं। इसके बावजूद दोनों हस्तियों ने किसी से शिकायत न करके यह कहा “अल्लाह गवाह है, मौलाना ने कहा कि रिवायतें लंबी हैं, लेकिन उनकी ज़िंदगी का हर पहलू सब्र, करार और इस्लामी अख़लाक़ की अनूठी मिसाल है।

मजलिस का आयोजन राजा सैय्यद काज़िम रज़ा आब्दी उर्फ़ ‘नज्मी’ के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मौजूद रहे, एडवोकेट सैय्यद सईद हसन, सैय्यद शाकिर हुसैन, सैय्यद आबिद हसन, शरीफ मंज़िल,

मुन्ना टेलर, सैय्यद हसन, सैय्यद वक़ार मेहंदी, सगीर हसन शेरू, सैय्यद आलीशान रज़ा, सैय्यद रेहान रज़ा, इसरास हुसैन सहित मीरानपुरा कमेटी के सभी सदस्य मौजूद रहे।

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27 thoughts on “इसाल-ए- सवाब की मजलिस में मौलाना सैय्यद मैहताब हुसैन बलरामपुरी ने रसूले अकरम और जनाबे फात्मा ज़ैहरा के फ़जा़इल पर डाली रोशन!

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