रिपोर्ट News10plus| अम्बेडकरनगर। जनपद में भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को उजागर करना अब पत्रकारों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आरोप है कि अनियमितताओं को सामने लाने वाले पत्रकारों पर दबाव बनाया जा रहा है,
उनका वीडियो बनाकर उन्हें फोन के माध्यम से डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरे मामले में कई सफेदपोश प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं।
ऐसे में भला जनसमस्याओं को उजागर करने वालो कि सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो सकती है। बहरहाल प्रदेश में भले ही भाजपा शासित राज्य है लेकिन अम्बेडकरनगर जनपद में अधिकांश रुप से विपक्ष पार्टी के लोग को बड़े बड़े निमार्ण कार्यो को कराने का दायित्व मिल रहा हैं।
मामला विकास खंड टांडा अंतर्गत एनटीपीसी विवेकानंद कॉलोनी के सामने ठेकेदार धर्मेन्द्र वर्मा, और उनके भाई आनंद वर्मा द्वारा कराया जा रहा है नाली निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण कार्य में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि नाली निर्माण के लिए जो खुदाई की गई है, वह आवश्यकता से अधिक चौड़ी और असमान है। नाली को सीधी दिशा में बनाने के बजाय घुमावदार ज़िग-ज़ैग तरीके से तैयार किया जा रहा है,
जिससे भविष्य में जल निकासी प्रभावित हो सकती है और गंदगी जमा होने की आशंका बढ़ जाएगी। इससे न केवल क्षेत्र की स्वच्छता प्रभावित होगी, बल्कि आसपास के घरों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, निर्माण स्थल पर बिजली विभाग के ट्रांसफार्मर को हटाने के लिए कोई लिखित अनुमति नहीं ली गई है। माना जा रहा है कि मार्च क्लोज़िंग से पहले कार्य पूर्ण दिखाने की जल्दबाजी में ठेकेदार द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है।
इसके अलावा, नाली के बेस (फर्श) में मानकों के अनुरूप कार्य नहीं किया जा रहा है। केवल बालू की परत डालकर निर्माण किया जा रहा है,जबकि आवश्यक गुणवत्ता सामग्री का उपयोग नहीं हो रहा। साथ ही, सरिया (लोहे के जाल) का उपयोग भी निर्धारित मानकों के विपरीत बताया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इसी प्रकार कार्य जारी रहा, तो यह न केवल सरकारी धन (राजस्व) की बर्बादी होगी, बल्कि क्षेत्रवासियों को भी लंबे समय तक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
फिलहाल, इतने बड़े स्तर पर हो रही अनियमितताओं को लेकर संबंधित विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।




