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एसआईआर बना बीएलओ के लिए “अग्निपरीक्षा” ड्यूटी के बोझ तले टूटी ज़िंदगी? बीएलओ की मौत के बाद परिजनो में पसरा मातम

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अम्बेडकरनगर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विषेश प्रागढ़ पुनरीक्षण एसआईआर अभियान के तहत अम्बेडकर नगर जनपद में जिला निर्वाचन आयोग के निर्देशन में चलाए जा रहे एसआईआर गणना प्रपत्र सत्यापन में ज़मीनी स्तर पर किसी बीएलओ के लिए कठिन परिश्रम से कम नही साबित हुआ।

जहां घर-घर जाकर बीएलओ द्वारा मतदाताओं का सत्यापन कराना, प्रपत्र भरना, त्रुटियाँ सुधारना और तय समयसीमा में रिपोर्ट देना – इन सभी जिम्मेदारियों ने कई बीएलओ को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा जिसमें काफी हदतक बीएलओज़ सब कुछ देखते हुए मज़बूती से खड़े रहकर अपने कार्य को पूरा करने में सफल रहे।लेकिन कुछ बीएलओ ने इसे अपने ऊपर बोझ समझा और वे परिस्थितियों से नहीं निपट सके इन्हीं कारणों से मानसिक तनाव में रह कर बीमार हुए और उनकी मौतें हुई हालांकि जिंदगी और मौत ईश्वर के हाथ में है इसका दोष किसी अन्य पर नही मढ़ा जा सकता। 

बताते चलूं विकास खण्ड टाण्डा की ग्रामसभा महेशपुर से एक मामला प्रकाश में आया है, जो दिलों को झकझोर देने वाला मामला बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी सूत्रों के अनुसार महेशपुर में तैनात बीएलओ शकुंतला ने पारिवारिक परेशानियों के बावजूद

एसआईआर कार्य को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। परिजनों के अनुसार वह लगातार दिन-रात क्षेत्र में घूमकर मतदाताओं के सत्यापन, फार्म पूर्ण कराने और दस्तावेजों को समय से जमा कराने में जुटी रहीं।

परिजनों का मानना है कि बढ़ते कार्य के चलते उनकी सेहत धीरे-धीरे गिरती चली गई और वो बीमार हो गई जब उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई, तब उन्हें महामाया मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान बीती 29 जनवरी 2026 को उनकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि शकुंतला का परिवार पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा था। घर की आजीविका का मुख्य सहारा वहीं आंगनबाड़ी कार्यकात्री थीं। उनके पति अख़बार बांटने का कार्य करते हैं किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

अब उनके असामयिक निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

परिजनों का मानना है कि सरकार और प्रशासन की अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान की जिम्मेदारी होती है, वही आज इस परिवार से पूरी तरह दूरियां बनाए हुए हैं। अब तक न तो किसी अधिकारी ने घर पर पहुँचकर हाल-चाल लिया और न ही किसी तरह की आर्थिक सहायता उपलब्ध गई।

परिवार का कहना है कि कुछ दिन पूर्व टाण्डा क्षेत्र में एक अन्य बीएलओ की मृत्यु के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी, जिसे परिजनों ने मानवीय सहयोग बताया।

इसी उम्मीद के साथ स्वर्गीय शकुंतला के परिजनों ने समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष से अपील की है कि उनकी पीड़ा और मांग को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुँचाया जाए, ताकि उन्हें भी राहत मिल सके।

परिजनों का कहना है कि स्वर्गीय शकुंतला ने वर्तमान में एसआईआर के कार्य से जुड़े सभी दायित्वों का ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन किया है। ऐसे में सरकार और

प्रशासन की ओर से बीएलओ जैसे फील्ड कर्मियों के लिए बीमा, पेंशन और स्थायी सुरक्षा कवच जैसी व्यवस्था लागू किए जाने की आवश्यकता है, ताकि ड्यूटी के दौरान किसी अनहोनी की स्थिति में उनका परिवार बेसहारा न हों।

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